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प्रयागराज ब्यूरो, संजय खान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और आशुतोष ब्रह्मचारी के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। हाल ही में आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे षड्यंत्र बताया और कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक और धार्मिक साजिश की जा रही है।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि अगर उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है तो उसे पुलिस के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और यदि उनके खिलाफ एविडेंस साबित होता है तो वे कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं। ब्रह्मचारी ने इसे “कलयुग का अंत” जैसा बयान बताते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर सख्त सजा सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों के पीछे कुछ राजनीतिक और संगठनात्मक तत्व शामिल हैं। ब्रह्मचारी ने कहा कि जिस व्यक्ति का जिक्र किया जा रहा है, वह ब्राह्मण संगठन से जुड़ा था और कथित तौर पर एक स्थानीय जनप्रतिनिधि से भी उसका संबंध बताया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

ब्रह्मचारी ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार की गई तस्वीरें दिखाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि इस मामले में स्थानीय पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां भी सच्चाई की जांच कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी एजेंसी द्वारा जांच करवाई जा सकती है क्योंकि उनके अनुसार उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं। धार्मिक विवाद को लेकर ब्रह्मचारी ने कहा कि शंकराचार्य को जो कहना है, वह कुछ दिनों तक कह सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार बाद में सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के साथ कथित रूप से गलत हुआ है, उन्हें न्याय दिलाने के लिए वे संघर्ष जारी रखेंगे।

ब्रह्मचारी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अतीत में राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 के दंगों के संदर्भ में उन्हें इतिहास में गलत तरीके से “हिस्ट्रीशीटर” बताया गया। उनके अनुसार अगर पांच से अधिक मुकदमे किसी व्यक्ति पर हैं तो उसे हिस्ट्रीशीटर घोषित किया जाना चाहिए, और यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। इस पूरे विवाद में राजनीतिक बयानों का भी असर देखने को मिला है। ब्रह्मचारी ने समाजवादी पार्टी को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि कुछ राजनीतिक दलों द्वारा धार्मिक मुद्दों पर हस्तक्षेप किया जा रहा है। हालांकि इन दावों पर राजनीतिक दलों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मामले में ब्रह्मचारी ने स्पष्ट किया कि यदि उनके खिलाफ गंभीर आरोप साबित होते हैं तो वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां किसी भी स्तर पर मामले की जांच कर सकती हैं। वहीं दूसरी ओर, शंकराचार्य परंपरा से जुड़े धार्मिक पक्ष का कहना है कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे साक्ष्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल यह मामला धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे की कानूनी तथा प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

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